करोना से गंभीर लड़ाई लड़ रहा है मध्यप्रदेश

संवेदना, सक्रियता और साहस के तीन मंत्रों से जीती जाएगी यह जंग


-प्रो.संजय द्विवेदी



   मध्यप्रदेश उन राज्यों में है जहां करोना का संकट कम नहीं है। खासकर भोपाल, इंदौर जैसे शहर करोना के हाटस्पाट के रुप में मीडिया में अपनी जगह बनाए हुए हैं, वहीं 2168 मरीजों के साथ देश के राज्यों में पांचवें नंबर पर उसकी मौजूदगी बनी हुई है। ऐसे कठिन समय में संवेदनशील नेतृत्व, सही दिशा और स्पष्ट नीति के साथ आगे बढ़ना जरूरी था। विगत 23 मार्च,2020 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद शिवराज सिंह चौहान के सामने यह चुनौती थी कि वे राज्य को करोना के कारण उत्पन्न संकटों से न सिर्फ उबारें बल्कि जनता के मन में अवसाद और निराशा की भावना पैदा न होने दें। क्योंकि यह लड़ाई सिर्फ मैदानी नहीं है, आर्थिक नहीं है, बल्कि मनोवैज्ञानिक भी है। ऐसे समय में राज्य शासन और उसके मुखिया की संवेदना अपेक्षित ही नहीं,अनिवार्य है। उन्होंने सत्ता संभालते ही अपने चिकित्सा अमले को आईआईटीटी(IITT) यानि आइडेंटिटीफिकेशन,आइसोलेशन, टेस्टिंग और ट्रीटमेंट का मंत्र दिया। सेंपल एकत्रीकरण टेस्टिंग की क्षमता में वृद्धि को बढ़ाने की दिशा में तेजी से प्रयास हुए।


सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्थाएं-


     यह जानना जरुरी है कि अपने विशाल भौगोलिक वृत्त में मध्यप्रदेश किस तरह चुनौतियों का सामना कर एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। इसके लिए मध्यप्रदेश ने एक साथ कई मोर्चों पर काम प्रारंभ किया और सबमें सफलता पाई। मात्र दो दिन में 450 कर्मचारियों का प्रशिक्षण कर उसने राज्य स्तरीय कोरोना नियंत्रण कक्ष की स्थापना की। इस नियंत्रण कक्ष के माध्यम से नागरिकों की समस्याओं का पंजीयन, राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों का प्रादेशिक अधिकारियों, जिला मजिस्ट्रेटों और आवासीय आयुक्तों से प्रभावी संपर्क सुनिश्चित किया गया। इसके साथ ही सीएम हेल्पलाइन और वाट्सअप नंबर का प्रचार प्रसार, भोजन, राशन, चिकित्सा, आवास जैसी व्यवस्थाएं दृढ़ता से लागू की गईं। सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था इसका एक और आयाम था जिसके तहत राज्य स्तर पर अधिकारियों की व विशेषज्ञों की कोर टीम तैयार हुई। सभी स्तर के अधिकारियों की द्वितीय पंक्ति को तैयार कर मैदान में उतार दिया गया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं अग्रणी रहते हुए मैदान में उतरे। भोपाल में सड़कों पर उतरकर, अस्पतालों में जाकर उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ खड़ी है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री प्रतिदिन मैदानी अधिकारियों से वीडियो कांफ्रेस के माध्यम से उन्हें प्रेरित करते दिखे।


    लाकडाउन के दौरान आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए प्रभावी संपर्क और समन्वय बनाना एक ऐसा काम था जिससे स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखना संभव हुआ। डेटा आधारित रणनीति बनाना किसी भी संकट से निजात दिलाने की पहली शर्त है। कोविड पोर्टल में प्रदेश का महामारी डाटाइस संग्रहित हो रहा है।इस पोर्टल के माध्यम से कोरोना से युद्ध की नीतियां तैयार हो रही हैं तथा संदिग्ध और पाजिटिव मामलों पर नजर रखी जा रही है। कोरोना वारियर्स,सार्थक एप के माध्यम से घर-घर जाकर सर्वेक्षण, सैंपलिंग, फालोअप,पाजिटिव केस पंजीयन का काम कर रहे हैं। उपकरण और अधोसंरचना के क्षेत्र में प्रदेश में पीपीई किट्स का निर्माण प्रारंभ हुआ। अब डाक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, सुरक्षा व्यवस्था में लगे पुलिसवालों तथा अन्य कर्मियों के लिए पर्याप्त मात्रा में पीपीई किट्स की उपलब्धता कराते हुए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की गयी। लोगों में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुर्वेद, होम्योपैथ और यूनानी रोग प्रतिरोधक दवाओं तथा त्रिकुट काढ़ा चूर्ण का वितरण भी किया गया। इस अभियान से लगभग एक करोड़ लोग लाभान्वित हुए।


कोरोना योद्धाओं को संरक्षण-


 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वास्थ्य कर्मियों के लिए 50 लाख तक का बीमा घोषित किया है। इसी को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने करोना संकट से लड़ने वाले सभी विभागों के कर्मियों के लिए मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना घोषित की है। इसमें सेवा के दौरान मृत्यु पर कर्मियों के आश्रितों को 50 लाख रुपए की मदद का प्रावधान है। जिला खनिज निधि का कोरोना से लड़ाई में उपयोग हो सकते इसकी स्वीकृति भी सरकार ने दी है। इसके तहत प्रदेश के 11 जिले 811 लाख रुपए की निधि का उपयोग करने की स्वीकृति मुख्यमंत्री से ले कर राहत के कामों में जुट गए हैं। इससे संबंधित जिलों में मेडिकल उपकरणों की खरीदी, नए आईसीयू बेड की स्थापना,पीपीई किट आदि की व्यवस्थाएं संभव हो सकी हैं। अपनी जान को जोखिम में डालकर सेवा करने वाले डाक्टर्स, नर्स,वार्ड ब्याव आदि करोना योद्धाओं को उनके समर्पण और संकल्प के लिए दस हजार रुपए प्रतिमाह की सेवा निधि की व्यवस्था की गई है।इसके साथ ही पुलिस कर्मियों को कर्मवीर पदक और अन्य विभागों के कर्मियों को कर्मवीर सम्मान देने की बात है।


    इस संदर्भ में मुख्यमंत्री भी लोगों में साहस भरते हुए नजर आते हैं। वे साफ कहते हैं कि “कोरोना ऐसी बीमारी नहीं है जो ठीक न हो सके। यदि लक्षण दिखने पर उसका इलाज करा लिया जाए, तो यह बीमारी ठीक हो जाती है।” उन्होंने आर्थिक चिंताओं पर यह कह संबल दिया कि “जान है तो जहान है। आर्थिक मामले तो ठीक कर लिए जाएंगें, किंतु हम ही न रहे तो सारी प्रगति के मायने क्या हैं।” यानि मुख्यमंत्री अपेक्षित संवेदनशीलता के साथ लोंगो को साहस और ताकत देते नजर आते हैं। जिसमें उनकी नजर में जनता का स्वास्थ्य पहली प्राथमिकता है।


सामान्य जनों को मदद का भरोसा-   


  राज्य के गरीब परिवारों को एक माह का निःशुल्क राशन देने की व्यवस्था ने तमाम परिवारों को मुस्कराने का मौका दिया। अनूसूचित जाति-जनजाति विभाग द्वारा अतिथि शिक्षकों का अप्रैल माह तक का अग्रिम भुगतान, आहार अनुदान योजना में अति पिछड़ी जनजाति की महिलाओं के खाते में एक हजार रूपए के मान से दो महीने का अग्रिम भुगतान किया गया। मध्यप्रदेश सरकार की चिंताओं में मजदूर वर्ग भी था। इसके तहत 22 राज्यों में फंसे 7 हजार प्रवासी मजदूरों के खाते में 70लाख रुपए की सहायता राशि भेजी गई। यही नहीं दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों और विद्यार्थियों को प्रदेश में लाने का बड़ा अभियान भी चलाया गया। पहले ही दिन 80 हजार से अधिक मजदूर अपने घर पहुंचे। बैंकों के सहयोग से सरकार की विभिन्न योजनाओं के 17 सौ करोड़ रुपए जरुरतमंदों के खाते में जमा किए गए। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के तहत 46 लाख हितग्राहियों को के खातों में दो महीने की पेंशन की राशि अग्रिम के तौर पर जमा करने का निर्णय भी साधारण नहीं था। प्रदेश के सभी जिलों में संबल योजना का क्रियान्वयन प्रारंभ कर सभी हितग्राहियों को राहत दी गई। किसानों को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की संवेदना बहुज्ञात है। फसल बीमा सहित मंडियों को प्रारंभ कराना और फसल ऋण में राहत ऐसे कदम से थे, जिससे किसानों को सीधी राहत मिली।  


जनसंगठनों की मदद से राहत अभियान को गति-


कोरोना संकट में राहत कार्यों में योगदान के लिए 33 हजार लोंगो का पंजीयन कराकर विभिन्न सेवा के कामों में उनकी सहायता ली गयी। जन अभियान परिषद के नेटवर्क से जुड़े 11,826 स्वैच्छिक संगठनों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक सप्ताह के भीतर प्रदेश के हजारों गांवों में दीवाल लेखन के माध्यम से जागरूकता पैदा की। इसके साथ ही कोरोना संबंधी कामों में जनअभियान परिषद के 55 से 60 हजार कार्यकर्ता सतत रूप से लगे हुए हैं।


    इसी दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विशेषज्ञों से संवाद तो कर ही रहे हैं। इसके अलावा आध्यात्मिक नेताओं से भी वे संवाद के माध्यम से राह दिखाने की अपील कर रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने ‘कोविड 19 की चुनौतियां और एकात्म बोध’ विषय पर देश के प्रख्यात आध्यात्मिक नेताओं व चिंतकों से उनकी राय जानी। इसके पूर्व उनके विशेषज्ञ समूह में शामिल नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी,  पूर्व मुख्यसचिव निर्मला बुच और अन्य सामाजिक चिंतकों से वे संवाद कर चुके हैं। हम देखते हैं कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की संवेदना, सक्रियता, साहस और बेहतर सोच ने मध्यप्रदेश को इस संकट में संभलने का अवसर दिया है। उम्मीद की जानी चाहिए कि शीध्र ही मध्यप्रदेश और देश करोना के संकट के मुक्त होकर सर्वांगीण विकास के पथ पर एक  नई यात्रा पर निकलेगा।


(लेखक मीडिया विमर्श पत्रिका के कार्यकारी संपादक और वरिष्ठ पत्रकार हैं।)